ग्रामीणों का भरोसा जीतने से कमजोर पड़ा नक्सल नेटवर्क – सुंदरराज पी

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सुनियोजित रणनीति और लगातार अभियान से बदल रही बस्तर की तस्वीर

बस्तर से लौट कर बीता चक्रवर्ती

दूसरी किस्त

कोरबा। कभी नक्सल हिंसा और भय के लिए पहचान रखने वाला बस्तर अब बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल उन्मूलन को लेकर दिखाई गई मजबूत इच्छाशक्ति का असर अब जमीन पर साफ नजर आने लगा है। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और विकास योजनाओं ने ग्रामीणों के भीतर भरोसा बढ़ाया है।
कोरबा से पहुंची महिला पत्रकारों की टीम की मुलाकात बस्तर आईजी सुंदरराज पी से हुई। उन्होंने बताया कि बीते वर्षों में सुरक्षा बलों ने योजनाबद्ध तरीके से अभियान चलाया। उन्होंने माना कि गढ़चिरौली जैसे कई ऐसे क्षेत्र बड़ी चुनौती रहे, जहां कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद अभियान जारी रखा गया।
आईजी ने कहा कि केवल हथियारों के बल पर नहीं, बल्कि ग्रामीणों की सोच बदलने पर भी विशेष काम किया गया। गांवों में पहुंचकर लोगों के बीच विश्वास कायम किया गया, जिसका असर अब दिख रहा है। बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि टीमवर्क और सुनियोजित रणनीति से बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में लगातार सफलता मिल रही है।

डीएसपी दीपमाला और एसडीओपी राहुल उइके ने साझा किए अभियान के अनुभव

यात्रा के दौरान डीएसपी दीपमाला ने महिला पत्रकारों की टीम को कुछ आत्मसमर्पित नक्सलियों से रूबरू कराया। कभी बंदूक थामने वाले ये लोग अब सामान्य जीवन जी रहे हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि वे भटक गए थे और अब संविधान तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा कर नई शुरुआत करना चाहते हैं। दूसरे दिन टीम दंतेवाड़ा पहुंची, जहां बस्तर पुलिस की टीम पहले से मौजूद थी। मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन के बाद टीम ने बारसूर क्षेत्र का भ्रमण किया। इस दौरान लंबे समय से बस्तर की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार अर्जुन पांडेय ने क्षेत्र के बदलते हालातों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिन इलाकों में कभी भय का माहौल रहता था, वहां अब सामान्य गतिविधियां बढ़ने लगी हैं। दंतेवाड़ा में टीम की मुलाकात एसडीओपी राहुल कुमार उइके से भी हुई। उन्होंने बताया कि नक्सली संगठन भोले-भाले ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर अपने साथ जोड़ते थे, लेकिन सुरक्षा बलों ने लगातार प्रयास कर लोगों का भरोसा जीता। उन्होंने कई अभियानों और मुठभेड़ों के अनुभव साझा किए, जिन्हें सुनकर टीम भावुक हो उठी।

उद्योग मंत्री लखन लाल की पहल पर महिला पत्रकारों ने देखा बदलता बस्तर

प्रदेश के उद्योग व श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन की पहल पर कोरबा से महिला पत्रकारों की टीम की बस्तर यात्रा सुनिश्चित की गई। इस यात्रा का उद्देश्य केवल भ्रमण नहीं, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हो रहे बदलाव और विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को समझना था। यात्रा के दौरान टीम ने बस्तर और दंतेवाड़ा के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण किया। वहां सुरक्षा व्यवस्था, ग्रामीणों के बदलते जीवन और आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व नक्सलियों की नई जिंदगी को करीब से देखा। पत्रकारों ने महसूस किया कि जिन इलाकों में कभी भय और असुरक्षा का माहौल था, वहां अब विकास और सामान्य जीवन की उम्मीद दिखाई देने लगी है।

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