600 ग्राम के नन्हे योद्धा ने जीती जिंदगी की जंग, 25 हफ्ते में जन्म के बाद 90 दिन NICU में चला इलाज
15 जून को महज 600 ग्राम वजन के साथ हुआ जन्म, 19 सितंबर तक पहुंचा 2 किलो 70 ग्राम; चार साल के इंतजार के बाद परिवार के घर लौटने वाली है खुशियां
कोरबा। उम्मीद कितनी भी छोटी क्यों न हो, मजबूत हौसले और बेहतर चिकित्सा देखभाल से जिंदगी की मुश्किल जंग भी जीती जा सकती है। कोरबा के शिवाय हॉस्पिटल में जन्मे एक नन्हे मासूम ने इसका उदाहरण पेश किया है। महज 25 सप्ताह के गर्भकाल में 600 ग्राम वजन के साथ जन्मे बच्चे ने करीब 90 दिनों तक NICU में उपचार और निगरानी के बाद अब 2 किलो 70 ग्राम वजन हासिल कर लिया है। बच्चे को अब डिस्चार्ज करने की तैयारी की जा रही है।
15 जून की रात अस्पताल पहुंची गर्भवती महिला
सर्वमंगला नगर निवासी विजय समर्थ और उनकी पत्नी करीब चार साल से अपने घर में बच्चे की किलकारी का इंतजार कर रहे थे। 15 जून 2026 की रात करीब 1 बजे गर्भवती महिला को गंभीर और आपात स्थिति में शिवाय हॉस्पिटल लाया गया। उस समय गर्भकाल महज 25 सप्ताह था।
स्थिति को देखते हुए अस्पताल की टीम ने तत्काल जांच और आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया शुरू की। करीब 2:20 बजे डिलीवरी हुई। नवजात का वजन महज 600 ग्राम था। जन्म के बाद बच्चे को तत्काल NICU में भर्ती किया गया।
90 दिन तक NICU में विशेषज्ञों की निगरानी
इतने कम वजन और समय से पहले जन्म लेने के कारण नवजात को विशेष देखभाल की आवश्यकता थी। करीब तीन महीने तक उसे NICU में विशेषज्ञ चिकित्सा निगरानी में रखा गया। इस दौरान श्वसन सहायता, नियंत्रित तापमान, पोषण और लगातार स्वास्थ्य मॉनिटरिंग जैसी आवश्यक देखभाल की गई।
Paediatric विशेषज्ञ डॉ. नागेंद्र बागरी सहित NICU टीम ने बच्चे की लगातार निगरानी की। वहीं RMO डॉ. प्रवीण और डॉ. बरखा ने भी बच्चे की देखरेख में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
600 ग्राम से बढ़कर 2.070 किलो हुआ वजन
इलाज और लगातार देखभाल के बीच बच्चे की सेहत में धीरे-धीरे सुधार होता गया। जन्म के समय 600 ग्राम वजन वाला बच्चा अब 19 सितंबर तक 2 किलो 70 ग्राम का हो चुका है। डॉक्टरों के अनुसार बच्चे की स्थिति में लगातार सुधार हुआ है और अब उसे डिस्चार्ज किए जाने की तैयारी की जा रही है।
RMO डॉ. प्रवीण ने कहा कि अस्पताल का उद्देश्य मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के साथ उन्हें स्वस्थ जीवन की ओर ले जाने का प्रयास करना है।
चार साल के इंतजार के बाद परिवार को मिली बड़ी खुशी
बच्चे के पिता विजय समर्थ ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार अपने बच्चे को देखा तो वह बेहद छोटा और नाजुक था। उस समय परिवार के सामने चिंता और डर का माहौल था। करीब तीन महीने तक अस्पताल में बच्चे के इलाज और निगरानी के दौरान हर दिन परिवार उसकी सेहत में सुधार की उम्मीद करता रहा।
विजय समर्थ के अनुसार, शिवाय हॉस्पिटल के डॉक्टरों और नर्सिंग टीम ने बच्चे के उपचार के साथ परिवार को भी लगातार हिम्मत दी। अब बच्चे का वजन बढ़ने और स्वास्थ्य में सुधार के बाद परिवार के लिए यह बेहद खुशी का पल है।
600 ग्राम से 2 किलो 70 ग्राम तक का सफर
15 जून को 600 ग्राम वजन से शुरू हुआ बच्चे का सफर 19 सितंबर तक 2 किलो 70 ग्राम तक पहुंच गया। परिवार के लिए यह सिर्फ वजन बढ़ने का आंकड़ा नहीं, बल्कि करीब 90 दिनों की चिंता, इंतजार, दुआ और उम्मीद का परिणाम है।
डॉ. नागेंद्र बागरी के अनुसार बच्चे की स्थिति में लगातार सुधार हुआ है और अब उसे डिस्चार्ज किए जाने की तैयारी है। शिवाय हॉस्पिटल की NICU टीम के लिए भी यह मामला बेहद कम वजन वाले समयपूर्व नवजात की लगातार देखभाल और उपचार का चुनौतीपूर्ण उदाहरण रहा।