अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने प्रशासन सख्त, बिना आयु प्रमाण के नहीं होंगी शादी की सेवाएं

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/जिला मुख्यालय। आगामी 19 अप्रैल 2026 को मनाए जाने वाले अक्षय तृतीया पर्व को लेकर प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग ने बाल विवाह की रोकथाम के लिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं। हर वर्ष इस पर्व पर कुछ क्षेत्रों में बाल विवाह के मामले सामने आते हैं, जिसे देखते हुए इस बार कड़ी निगरानी और जनसहयोग पर जोर दिया गया है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह कानूनन अपराध है। इसके बावजूद ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के अभाव के कारण यह कुप्रथा अब भी देखने को मिलती है, जिसके गंभीर दुष्परिणाम सामने आते हैं। बाल विवाह से कुपोषण, कम वजन के शिशु का जन्म और महिलाओं में एनीमिया जैसी समस्याएं बढ़ती हैं।
प्रशासन ने बताया कि प्रत्येक गांव में गठित ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समिति को सक्रिय कर दिया गया है। समिति में सरपंच, ग्राम सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हैं, जिन्हें बाल विवाह की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही आम नागरिकों से अपील की गई है कि यदि कहीं बाल विवाह की सूचना मिले तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। इसके लिए 112 आपातकालीन सेवा और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने धार्मिक आयोजकों, टेंट हाउस संचालकों, डीजे-बैंड, प्रिंटिंग प्रेस और अन्य सेवा प्रदाताओं से विशेष अपील की है कि वे बिना आयु प्रमाण पत्र के किसी भी वैवाहिक कार्यक्रम में अपनी सेवाएं न दें।

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