हसदेव बांगो बांध विस्थापितों के समर्थन में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, अधिकार नहीं मिले तो हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
कोरबा। हसदेव बांगो बांध से प्रभावित विस्थापित परिवारों के समर्थन में रविवार को बुका में कांग्रेस ने विशाल महासम्मेलन आयोजित कर राज्य सरकार पर आदिवासी अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाया। सम्मेलन में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, सांसद ज्योत्सना महंत, पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। कार्यक्रम में 52 गांवों के बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार और महिलाएं शामिल हुईं।
महासम्मेलन में मुख्य रूप से बांगो जलाशय में विस्थापित आदिवासियों को मछली पकड़ने और उसके विक्रय का स्वतंत्र अधिकार वापस देने की मांग उठाई गई। विस्थापितों ने बताया कि वर्ष 1991 में बांध निर्माण के बाद वे स्वयं मछली पकड़कर सरकार को मामूली रॉयल्टी देकर अपनी आजीविका चलाते थे, लेकिन वर्ष 2003 में ठेका प्रथा लागू होने के बाद उनका यह अधिकार छिन गया।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि जलाशय में मछली पकड़ने की कोशिश करने वाले आदिवासियों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वनाधिकार कानून को लागू करने में विफल रही है, जबकि विधानसभा में यह स्वीकार किया जा चुका है कि जलाशयों में मछली पकड़ने वाले आदिवासियों पर भी यह कानून लागू होता है। डॉ. महंत ने चेतावनी दी कि यदि विस्थापितों को उनका अधिकार वापस नहीं मिला तो कांग्रेस पार्टी उनके साथ मिलकर हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ेगी।
पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि उन्होंने मंत्री रहते हुए वर्ष 2022 में पेसा कानून का प्रारूप तैयार किया था, लेकिन सरकार बदलने के बाद अब तक उसे लागू नहीं किया गया। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों के अधिकारों की लगातार अनदेखी किए जाने का आरोप लगाया।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय लोगों का पहला अधिकार होने के बावजूद विस्थापित परिवारों को उनके पारंपरिक रोजगार से दूर किया जा रहा है। सम्मेलन के जरिए कांग्रेस ने स्पष्ट संकेत दिया कि आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर बड़ा आंदोलन बन सकता है।