रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में सड़क ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने भारत माला परियोजना के अंतर्गत रायपुर जिले के आरंग से बिलासपुर जिले के दर्री तक लगभग 95 किलोमीटर लंबा 6-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे बनाने का प्रस्ताव रखा है। यह कॉरिडोर बनने के बाद प्रदेश की दो प्रमुख शहरों के बीच आवागमन तेज़ और सुगम होने की उम्मीद है।
जानकारी के मुताबिक, इस परियोजना का उद्देश्य न केवल यात्री यातायात को बेहतर बनाना है, बल्कि औद्योगिक परिवहन को भी गति देना है। रायपुर–बिलासपुर मार्ग पर कोयला, लौह अयस्क, स्टील और सीमेंट जैसे औद्योगिक उत्पादों का भारी आवागमन होता है। नया 6-लेन मार्ग बनने से माल परिवहन में लगने वाला समय घटेगा और लॉजिस्टिक्स लागत में भी कमी आने की संभावना है।
बताया जा रहा है कि राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के समक्ष प्रस्ताव रखा गया है। परियोजना को भारत माला नेटवर्क से जोड़ने की योजना है, ताकि यह कॉरिडोर राष्ट्रीय स्तर की कनेक्टिविटी का हिस्सा बन सके। मंजूरी मिलने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
शहर के ट्रैफिक को भी मिलेगी राहत
इसी कड़ी में बिलासपुर शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए बोदरी से सेंदरी तक लगभग 32 किलोमीटर लंबा 4-लेन बायपास बनाने का भी प्रस्ताव है। इस बायपास के जरिए भारी वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश किए बिना वैकल्पिक मार्ग मिल सकेगा। साथ ही प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर और लॉजिस्टिक हब को राष्ट्रीय राजमार्ग से सीधी कनेक्टिविटी देने की योजना भी है।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर बनने से रायपुर और बिलासपुर के बीच यात्रा समय में कमी आएगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और आसपास के औद्योगिक व शहरी क्षेत्रों का विकास तेज़ होगा। यह मार्ग भविष्य में मध्य भारत के प्रमुख औद्योगिक कॉरिडोर के रूप में भी उभर सकता है।
फिलहाल परियोजना केंद्र सरकार की स्वीकृति का इंतजार कर रही है। मंजूरी के बाद निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से शुरू किए जाने की संभावना है।
भारत माला परियोजना: आरंग से दर्री तक बनेगा 95 किमी लंबा 6-लेन कॉरिडोर, रायपुर–बिलासपुर सफर होगा एक घंटे में



