प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण का अनूठा संगम: नंदनवन जंगल सफारी बना छत्तीसगढ़ का प्रमुख पर्यटन केंद्र 320 हेक्टेयर में फैला नंदनवन, हर साल लाखों पर्यटकों को कर रहा आकर्षित



रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर (अटल नगर) के सेक्टर-39 में स्थित नंदनवन जंगल सफारी आज राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों और वन्यजीव संरक्षण केंद्रों में अपनी अलग पहचान बना चुका है। लगभग 320.15 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह विशाल परिसर प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीवों के प्रति रुचि रखने वाले लोगों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां पर्यटक प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को करीब से देखने के साथ-साथ जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की जानकारी भी प्राप्त करते हैं।
मिनी जू से आधुनिक जंगल सफारी तक का सफर
नंदनवन की शुरुआत वर्ष 1979 में रायपुर में एक मिनी जू के रूप में हुई थी, जिसे वन्यजीवों के रेस्क्यू और पुनर्वास केंद्र के रूप में विकसित किया गया। वर्ष 2008 में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) ने इसे आधिकारिक मान्यता प्रदान की। इसके बाद नवा रायपुर में आधुनिक जंगल सफारी विकसित करने की योजना बनी और वर्ष 2012 से 2015 के बीच इसका निर्माण किया गया। 1 नवंबर 2016 को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया।
रोमांच से भरपूर पांच प्रमुख सफारी
नंदनवन जंगल सफारी में पर्यटकों के लिए कई रोमांचक सफारी राइड्स उपलब्ध हैं—
शाकाहारी सफारी (30.89 हेक्टेयर): चीतल, सांभर, नीलगाय और काला हिरण प्राकृतिक वातावरण में विचरण करते दिखाई देते हैं।
भालू सफारी (20.03 हेक्टेयर): भालुओं को खुले प्राकृतिक परिवेश में देखने का अनूठा अनुभव मिलता है।
बाघ सफारी (20.04 हेक्टेयर): देश के राष्ट्रीय पशु बाघ को नजदीक से देखने का रोमांच।
सिंह सफारी (20.01 हेक्टेयर): एशियाई शेरों के संरक्षण और दर्शन का अवसर।
जू जोन (50 हेक्टेयर): विभिन्न प्रजातियों के पक्षी, सरीसृप और अन्य वन्यजीव पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
दुर्लभ वन्यजीव भी हैं आकर्षण का केंद्र
नंदनवन में पशु विनिमय कार्यक्रम के माध्यम से कई दुर्लभ वन्यजीवों को लाया गया है। यहां सफेद बाघ, दरियाई घोड़ा, घड़ियाल और क्लोन जंगली भैंसा ‘दीपाशा’ पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण बने हुए हैं।
संरक्षण के साथ पर्यावरण शिक्षा पर भी जोर
नंदनवन जंगल सफारी का उद्देश्य केवल वन्यजीवों का संरक्षण ही नहीं, बल्कि लोगों में पर्यावरण और जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। यहां समय-समय पर विद्यार्थियों और पर्यटकों के लिए पर्यावरण शिक्षा एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विश्व बाघ दिवस, अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस और वन्यजीव सप्ताह जैसे अवसरों पर विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
लगातार बढ़ रही पर्यटकों की संख्या
वनमंडलाधिकारी थेजस शेखर के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में नंदनवन जंगल सफारी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2025-26 में यहां 3 लाख 24 हजार 785 से अधिक पर्यटक पहुंचे, जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है। इससे पहले भी हर वर्ष लाखों देशी-विदेशी पर्यटक यहां का भ्रमण कर चुके हैं।
रायपुर से आसान पहुंच
नंदनवन जंगल सफारी स्वामी विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, रायपुर से लगभग 15 किलोमीटर तथा रायपुर रेलवे स्टेशन से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित है। पर्यटकों की सुविधा के लिए यहां पहुंचना बेहद आसान है। प्रत्येक सोमवार को जंगल सफारी बंद रहती है।
प्रकृति से जुड़ने का बेहतरीन अवसर
नंदनवन जंगल सफारी आज छत्तीसगढ़ में पर्यटन, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा का ऐसा अनूठा केंद्र बन चुका है, जहां लोग प्रकृति के बीच वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक परिवेश में देखने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश भी लेकर लौटते हैं।