पुराने वादे पूरे करो, फिर कराओ जनसुनवाई: मानिकपुर परियोजना पर जयसिंह अग्रवाल का SECL को अल्टीमेटम
कोरबा, 22 जुलाई। मानिकपुर ओपनकास्ट विस्तार परियोजना की प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई को लेकर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रभावित ग्रामीणों के वर्षों से लंबित मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार और विस्थापन से जुड़े मामलों का समाधान किए बिना जनसुनवाई आयोजित करना केवल औपचारिकता होगी, जिसे स्थानीय लोग स्वीकार नहीं करेंगे।
जयसिंह अग्रवाल ने SECL के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक को पत्र भेजकर मांग की है कि 21 अगस्त 2026 को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले सभी लंबित मुद्दों का निराकरण किया जाए। ऐसा नहीं होने पर जनसुनवाई तत्काल स्थगित कर नई तिथि घोषित की जाए।
उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय जनसुनवाई कोई खानापूर्ति नहीं, बल्कि हजारों प्रभावित परिवारों के भविष्य का सवाल है। भिलाई खुर्द, दादरखुर्द, मानिकपुर, इमलीडुग्गू, उरगा, कुरूडीह, बेन्दरकोना, गोढ़ी, पंडरीपानी और सेमीपाली समेत कई गांवों के लोग वर्षों से SECL के अधूरे वादों का बोझ उठा रहे हैं। पिछली जनसुनवाइयों में रोजगार, पुनर्वास, मुआवजा, सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, धूल नियंत्रण, ब्लास्टिंग से क्षति की भरपाई और स्थानीय परिवहनकर्ताओं को अवसर देने जैसे कई आश्वासन दिए गए थे, लेकिन अधिकांश अब तक पूरे नहीं हुए।
पूर्व मंत्री ने भिलाई खुर्द में हुए सर्वे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि करीब 50 परिवारों को मनमाने ढंग से सर्वे और मुआवजा प्रक्रिया से बाहर रखा गया, जबकि समान परिस्थितियों वाले अन्य मकानों को शामिल किया गया। उन्होंने सभी छूटे परिवारों का निष्पक्ष पुनः सर्वे कराने की मांग की।
उन्होंने पुनर्वास नीति की आलोचना करते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों को ₹6.91 लाख देकर स्वयं जमीन खरीदने और मकान बनाने की सलाह देना वास्तविकता से परे है। इतनी राशि में न जमीन खरीदी जा सकती है और न ही सम्मानजनक आवास बनाया जा सकता है। उन्होंने SECL से विकसित पुनर्वास कॉलोनी बसाने की मांग की।
जयसिंह अग्रवाल ने कचांदी नाला को किसानों की जीवनरेखा बताते हुए चेतावनी दी कि बिना वैज्ञानिक अध्ययन, वैकल्पिक व्यवस्था और ग्रामीणों की सहमति के इसके डायवर्सन को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने आबादी के बीच से कोयला परिवहन के बजाय मानिकपुर से बरबसपुर बायपास तक रेलवे लाइन के समानांतर वैकल्पिक सड़क बनाने का सुझाव दिया।
उन्होंने 1964 से 1968 के बीच तत्कालीन एनसीडीसी द्वारा अधिग्रहित भूमि के लंबित मुआवजा मामलों को भी उठाते हुए कहा कि छह दशक बाद भी कई परिवार अपने वैधानिक अधिकार के लिए भटक रहे हैं। SECL को विशेष अभियान चलाकर सभी पात्र उत्तराधिकारियों को मुआवजा दिलाना चाहिए।
जयसिंह अग्रवाल ने मांग की कि जनसुनवाई से पहले पुराने सभी आश्वासनों की अनुपालन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, लंबित मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार के मामलों का समाधान किया जाए, पुनर्वास पैकेज का पुनर्मूल्यांकन हो तथा जिला प्रशासन, SECL और प्रभावित ग्रामीणों की संयुक्त बैठक बुलाकर सभी विवादों का निपटारा किया जाए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस विकास की विरोधी नहीं है, लेकिन स्थानीय लोगों के अधिकारों और सम्मान से समझौता स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 21 अगस्त से पहले प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया और बिना समाधान के जनसुनवाई कराई गई, तो विरोध की स्थिति बनने पर उसकी पूरी जिम्मेदारी SECL प्रबंधन की होगी।