आश्रय से आत्मनिर्भरता तक: सम्मान के साथ सजी एक नई जिंदगी

Must read

कोरबा: आश्रम में रहने वाली किशोरी के बालिग होने के बाद उसके हाथ पीले हुए और सम्मान के साथ उसकी डोली उठी। उपेक्षा से भरे अतीत को पीछे छोड़ते हुए उसने नए जीवन की शुरुआत की। पिछले चार वर्षों से आश्रम में रहकर जीवन संवार रही बिंदु का विवाह सामाजिक सहभागिता और पारिवारिक वातावरण में संपन्न कराया गया।
यह पहल सुमति सामुदायिक संस्था की ओर से की गई, जो महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत रामपुर आइटीआइ में संचालित बालिका गृह से जुड़ी है। यहां बेसहारा और शोषण से पीड़ित नाबालिग बालिकाओं को सुरक्षित आश्रय, शिक्षा और जीवनोपयोगी प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और भविष्य के फैसले स्वयं ले सकें। परिस्थितियां अनुकूल होने पर विवाह का मार्ग भी खोला जाता है।
इसी क्रम में चार वर्षों से आश्रम में रह रही बिंदु 19 वर्ष, का विवाह बुधवार को अनिल के साथ आश्रम के पास स्थित एक गार्डन में कराया गया। विवाह पूरी तरह भारतीय परंपराओं के अनुसार संपन्न हुआ। मेहंदी रचे हाथों और चेहरे पर संतोष की मुस्कान के साथ बिंदु ने सात फेरे लिए। विदाई के समय आश्रम की दीवारें गवाह बनीं कि आश्रय में पली बेटी अब अपने घर की ओर बढ़ चली है। इस भावुक अवसर पर आश्रम संचालन से जुड़ी रुक्मणी नायर ने मां की भूमिका निभाई। उन्होंने कन्या को स्नेह और आशीर्वाद देकर विदा किया। वर अनिल छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी में कार्यरत है। आश्रम में रहकर पाली बढ़ी जिसकी शादी इसी आश्रम से तीन साल पहले हुई थी इसकी पहल से दोनों का रिश्ता तय हुआ, जो विश्वास और सहमति के साथ विवाह में परिणत हुआ। संस्था के माध्यम से इससे पहले भी पांच युवतियों के हाथ पीले कराए जा चुके हैं। पूर्व लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा कर बताया कि आश्रम में मिली शिक्षा, प्रशिक्षण और संबल ने उन्हें आत्मविश्वास दिया। यह विवाह भी उसी सिलसिले की कड़ी बना, जहां संरक्षण के साथ सम्मान को प्राथमिकता दी गई। विवाह समारोह में महापौर संजू देवी राजपूत, पार्षद नरेन्द्र देवांगन, पार्षद अशोक चावलानी, समाजसेवी कैलाश नाहक, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी व समाजसेवी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सहित महिला मंडल और सेवा भारती की महिला सदस्यों ने भी नवदंपती को शुभकामनाएं दीं। आश्रय से गृहस्थी तक का यह सफर बताता है कि संवेदनशीलता, निरंतर सहयोग और मानवीय दृष्टि से जीवन की दिशा बदली जा सकती है।

प्लास्टिक रहित समारोह से पर्यावरण संरक्षण का संदेश

बेसहारा युवती के विवाह को आयोजक संस्था ने सामाजिक सरोकार से आगे बढ़ाते हुए पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा। समारोह पूरी तरह प्लास्टिक रहित रखा गया, जिससे स्वच्छ और जिम्मेदार आयोजन का संदेश समाज तक पहुंचा। सजावट से लेकर अतिथि व्यवस्था तक में पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाए गए, जिन्हें लोगों ने सराहा।

भौतिक वस्तुओं की जगह राष्ट्रीय मूल्यों को महत्व

आयोजन के दौरान यह भी ध्यान रखा गया कि विवाह की स्मृति अतिथियों के साथ संस्कार और विचार के रूप में जाए। इसी उद्देश्य से संस्था की ओर से आए अतिथियों को रामायण, गीता और भारत माता की तस्वीर भेंट की गई। यह पहल उपहार की पारंपरिक सोच से अलग रही, जिसमें भौतिक वस्तुओं की जगह सांस्कृतिक और राष्ट्रीय मूल्यों को महत्व दिया गया। संस्था से जुड़े लोगों ने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में यह संदेश देना जरूरी है कि परंपरा निभाते हुए भी पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाई जा सकती है। यह विवाह सामाजिक संवेदना के साथ पर्यावरण चेतना का भी उदाहरण बनकर सामने आया।

More articles

Latest article