कोरबा | 29 जनवरी 2026
कोरबा जिला भारतीय जनता पार्टी के लिए 2 फरवरी 2026 का दिन एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है। वर्षों की प्रतीक्षा के बाद जिला भाजपा को अपना नया कार्यालय मिलने जा रहा है, जिसे “अटल स्मृति भवन” नाम दिया गया है। ग्राम रिसदी, जिला पुलिस लाइन के सामने प्रस्तावित इस भवन का भूमि पूजन प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मुख्य आतिथ्य में संपन्न होगा। आयोजन को लेकर जिला संगठन तैयारियों में जुटा हुआ है और कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है।
जिला अध्यक्ष गोपाल मोदी के कार्यकाल में यह भवन निर्माण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। संगठन के भीतर इसे एक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में उनके नेतृत्व से भी जोड़ी जाएगी।
लेकिन आयोजन से पहले उठे संगठनात्मक सवाल
इस ऐतिहासिक आयोजन के बीच एक ऐसा मुद्दा सामने आया है, जिसने पार्टी कार्यकर्ताओं और पुराने नेताओं के बीच चर्चा छेड़ दी है। भूमि पूजन के लिए जारी किए गए आमंत्रण पत्र में पार्टी के कुछ वरिष्ठ और वैचारिक आधार स्तंभ माने जाने वाले नेताओं के नाम शामिल नहीं हैं।
कोरबा भाजपा के शुरुआती दौर से जुड़े, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जनसंघ की पृष्ठभूमि वाले वरिष्ठ आदिवासी नेता ननकी राम कंवर का नाम आमंत्रण सूची में नहीं होने से कई कार्यकर्ता आश्चर्य जता रहे हैं।
कंवर को उन नेताओं में गिना जाता है जिन्होंने संगठन के शुरुआती संघर्ष के दौर में कोरबा क्षेत्र में विचारधारा को मजबूत करने का काम किया। वे आज भी सक्रिय रूप से संगठन से जुड़े हुए हैं। बावजूद इसके, उन्हें न तो विशिष्ट अतिथि और न ही आमंत्रित अतिथियों की सूची में स्थान मिला है।
प्रदेश भाजपा मंत्री ऋतु चौरसिया भी सूची से बाहर
इसी तरह कोरबा निवासी और वर्तमान में प्रदेश भाजपा मंत्री सुश्री ऋतु चौरसिया का नाम भी आमंत्रण पत्र में शामिल नहीं है। उनके पिता स्वर्गीय आर.के. चौरसिया लंबे समय तक संघ से जुड़े रहे और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे थे। ऐसे परिवार से जुड़े प्रतिनिधि का नाम सूची से गायब होना भी सवाल खड़े कर रहा है।
आयोजन और आमंत्रण सूची को लेकर उठी भौहें
राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर भी चर्चा है कि कार्यक्रम के मुख्य आयोजक जिला अध्यक्ष गोपाल मोदी स्वयं आमंत्रण पत्र में ‘विशिष्ट अतिथि’ के रूप में दर्ज हैं, जबकि कोरबा में पूर्व में संगठन का नेतृत्व कर चुके कई पूर्व जिलाध्यक्षों को स्थान नहीं मिला है।
इसे लेकर कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठन के निर्माण में भूमिका निभाने वाले पुराने नेताओं को ऐसे अवसरों पर सम्मानपूर्वक याद किया जाना चाहिए।
संगठनात्मक परंपरा बनाम नई कार्यशैली
अटल स्मृति भवन भाजपा के लिए एक भावनात्मक और वैचारिक प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में आमंत्रण सूची को लेकर उठे सवाल इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि क्या संगठन अपनी पुरानी पीढ़ी और वैचारिक जड़ों को पर्याप्त सम्मान दे पा रहा है या नहीं।
हालांकि, इस विषय पर जिला भाजपा की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन कार्यकर्ताओं के बीच यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है।



