निलंबित IPS रतनलाल डांगी के खिलाफ आरोप प्राथमिक जांच में प्रमाणित, हाईकोर्ट में पुलिस विभाग ने दी जानकारी
बिलासपुर। महिला योगा टीचर से जुड़े कथित अश्लील संदेश और धमकी के मामले में निलंबित आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग ने बताया कि मामले की प्राथमिक जांच में उनके खिलाफ लगाए गए आरोप प्रमाणित पाए गए हैं। वहीं, आगे की विभागीय जांच को लेकर भी प्रक्रिया जारी है।
पीड़िता के अधिवक्ता अभिषेक पांडेय के अनुसार, मामले की जांच के लिए आईपीएस दीपांशु काबरा को जांचकर्ता अधिकारी और आईपीएस प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त करने का प्रस्ताव डीजीपी की ओर से गृह सचिव को भेजा गया है। मामले में अब अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है।
जांच अधिकारियों की भूमिका पर पीड़िता ने उठाए सवाल
पीड़िता ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया था कि मामले की जांच ऐसे अधिकारियों से कराई जा रही है, जिनकी निष्पक्षता को लेकर उन्हें आपत्ति है। याचिका में जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया कि संबंधित अधिकारी आरोपी आईपीएस को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
याचिका में आईजी आनंद छाबड़ा की भूमिका पर भी आपत्ति जताई गई थी। पीड़िता ने महादेव सट्टा एप से जुड़े मामले में उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण विचाराधीन होने का उल्लेख करते हुए संवेदनशील मामले की जांच में उनकी नियुक्ति को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया था।
कथित संपत्तियों की जांच की भी मांग
पीड़िता ने रतनलाल डांगी से संबंधित कथित अवैध चल-अचल संपत्तियों की जांच कर वैधानिक कार्रवाई किए जाने की मांग भी की है। शिकायत में रायपुर, धरमपुरा, राजिम, कटघोरा और बिलासपुर के अलावा राजस्थान के विभिन्न स्थानों पर कथित संपत्तियों का जिक्र किया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन संपत्तियों से संबंधित शिकायत पर उचित तरीके से जांच नहीं की गई।
हाईकोर्ट ने अधिकारियों से मांगा था जवाब
इस मामले में 12 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इसे संवेदनशील मानते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा था। इसके बाद 2 सितंबर को हुई सुनवाई में पुलिस विभाग की ओर से जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। 29 सितंबर को प्रस्तावित सुनवाई नहीं हो सकी। अब मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होने की जानकारी दी गई है।
वीडियो कॉल से शुरू हुआ संपर्क, अश्लील संदेश भेजने का आरोप
यह पूरा मामला एक महिला योगा टीचर की शिकायत से जुड़ा है। याचिका के अनुसार, महिला का आरोप है कि तत्कालीन आईजी रतनलाल डांगी ने अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए वीडियो कॉल के माध्यम से उनसे योग सीखना शुरू किया था। इसके बाद कथित तौर पर उन्होंने महिला के व्हाट्सऐप नंबर पर अश्लील संदेश भेजने शुरू कर दिए।
महिला ने आरोप लगाया कि वीडियो कॉल के दौरान भी उनके साथ अश्लील व्यवहार किया जाता था। विरोध करने पर उन्हें और उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने तथा उनके पति के खिलाफ झूठा आपराधिक मामला दर्ज कराने की धमकी दी गई।
DGP से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
पीड़िता ने 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस महानिदेशक (DGP) के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद जांच के लिए आईपीएस अधिकारी आनंद छाबड़ा और मिलना कुर्रे को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
पीड़िता ने 20 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार के गृह विभाग के सचिव और छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग के सचिव को भी शिकायत भेजी। अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने अधिवक्ता अभिषेक पांडेय और ऋषभदेव साहू के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की।
फिलहाल मामले में विभागीय जांच की प्रक्रिया और हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर नजर बनी हुई है। प्राथमिक जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि मामले में आगे की कार्रवाई और अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद स्पष्ट होंगे।