चोढारानी पहाड से अचानक फूटा जलस्त्रोत, चमत्कार मान ग्रामीणों ने शुरू की पूजा – देखे वीडियो भूगर्भ शास्त्री ने क्या कहा

 

राजाराम राठौर

हरदीबाजार (BEC36)। प्रकृति जितनी खूबसूरत है ,उससे कहीं ज्यादा रहस्यमयी भी है। मनुष्य अपने जीवनकाल में प्रकृति की सुंदरता के साथ ही उसके रहस्यों से भी अवगत होता रहा है। कई बार प्रकृति इस तरह का नजारा प्रस्तुत कर देती है कि लोगों को दांतों तले उंगली दबाने में विवश हो जाना पडता है। कुछ इसी तरह का नजारा जिले के हरदीबाजार अंतर्गत चोढारानी मंदिर स्थित पहाड में भी सामने आया है। यहां अकस्मात पहाड के एक हिस्से से जलस्त्रोत फूट पडा है। नवरात्रि के दौरान हुई इस घटना को ग्रामवासी देवी का चमत्कार मानते हुए पूजा—अर्चना में लग गए है। दूसरी ओर इस घटना को लेकर भूगोल के जानकारों ने इसे सामान्य प्राकृतिक घटना बताया है। 

यह पूरा वाक्तया विकासखंड पाली के हरदीबाजार अंतर्गत प्रसिद्ध ग्राम पंचायत चोढा के चोढारानी मंदिर स्थित पहाड का है। यहां 30 सितंबर की देर शाम पहाड के एक हिस्से से अचानक पानी निकलने लगा। जिस समय पहाड से जलस्त्रोत फूटने की घटना हुई, उस समय मंदिर में समिति के पदाधिकारी मौजूद थे। उन्होंने जब कल—कल की ध्वनि सुनी तो कुछ समय के लिए वे ध्वनि की दिशा में कान लगाकर यह जानने उत्सुक हुए कि आखिर यह आवाज कहां से और कैसे आ रही है।  जब वे सभी उस दिशा में पहुंचे तो इनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा, जब इन्होंने देखा की पहाड के उपर से साफ स्वच्छ जल की धारा वेग के साथ बहते आ रही है। उस समय अंधेरा हो जाने के कारण इन सभी ने तय किया कि दूसरे दिन अर्थात एक अक्टूबर की सुबह पहाड के उपर चढेंगे और यह पता लगाया जाएगा कि आखिर इतना साफ और स्वच्छ जल कहां से निकल रहा है। दूसरे दिन तय समय में सभी मंदिर पहुंचे और पहाड के नीचे जहां पर उपर से गिर रहा जल धारा के रूप में बह रहा था। उस दिशा से उपर की चढाई चढने लगे। लगभग 250 फीट  चढाई चढने के बाद इन सभी ने देखा कि पहाड के एक खोह से जल की धारा बह रही है। यह देखते ही इनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। यह खबर आसपास में आग की तरह फैली और देखते ही देखते चोढारानी मंदिर के पहाड में भक्तों की भीड उमडने लगी। सभी ने इसे नवरात्रि के दौरान देवी का चमत्कार मानकर पूजा अर्चना शुरू कर दी। यह सिलसिला अब भी जारी है। इस संबंध में मंदिर समिति सहित ग्रामवासियों का मानना है कि वर्षों से मां चोढारानी मंदिर सहित पहाड में पानी के लिए लोगों को काफी दिक्कत उठानी पडती थी। यहां तक की मंदिर में भक्तों की सुविधा के लिए बनाए गए कुएं में भी गर्मी के दौरान कुआं सूख जाया करता था। ऐसे में जब इस नवरात्र में यहां पहाड के उपर से जल की धारा अपने आप बहने लगी है तो लोग इसे चमत्कार के रूप में ले रहे है।                

क्या कहते है भूगर्भ शास्त्री    

दूसरी ओर भूगर्भशास्त्री सुरेश कुमार चंद्राकर इस पूरे वाक्ये को सामान्य प्राकृतिक घटना बता रहे है। उनके अनुसार पहाडी क्षेत्र में वर्षों से पहाड के अंदर जल इकट्ठा रहता है। जब कभी मिट्टी धंसकने की घटना होती है तो पहाड के अंदर जमा जल स्त्रोत के रूप में जगह बनाकर बाहर आ जाता है और फिर यह लगातार बहने लगता है। यह जल इतना स्वच्छ और शुद्ध होता है कि मानव जीवन के लिए यह औषधि का भी काम करता है। भूगर्भशास्त्री के अनुसार इस तरह का जलस्त्रोत जिस तरह से अचानक बाहर आता है वैसे ही कभी भी अचानक यह समाप्त भी हो सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि उक्त पहाड के अंदर किस तरह का और कितनी मात्रा में जल का भराव है।